बोट वापसी कानून जरूरी है

बोट वापसी कानून जरूरी है

किसानों द्वारा लंबे समय आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री जी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की।
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बहुत अच्छी बात हैं, आखिर किसानों ने अपनी बात मनवा ली।

इस प्रकार का आंदोलन करना बड़ा मुश्किल कार्य  होता है इसमे बहुत सा पैसा व समय खर्च होता हैं।

कामकाजी व्यक्ति के लिए अपना धंधा छोड़ छाड़कर इस प्रकार धरने पर बैठना बहुत मुश्किल रहता हैं।

वर्तमान में प्रधानमंत्री जी यह कानून वापस लेकर इससे भी खराब कानून देश मे लागू कर देते हैं तो हम जनता के पास क्या विकल्प रह जाता हैं ?...

भारत मे हजारो भूरे व सैकड़ो काले कानून पहले से लागू है उनको वापस लेने के लिये हम क्या कर सकतें है?....

बहुत से कानून ऐसे होते हैं जो समाज के एक वर्ग के खिलाफ होते है जो टोटल जनसंख्या का 1से 2% तक ही रहता हैं।

जैसे छोटे व्यापारियों को बर्बाद करने के लिये GST तथा छोटे स्वर्णकारो के लिए हॉलमार्क की अनिवार्यता का कानून आदि

तो ये लोग चाहकर भी इतना बड़ा आंदोलन नहीं कर पाते हैं।

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तो हमें देश मे ऐसा पारदर्शी सिस्टम चाहिए, जिसके माध्यम जनता बहुमत साबित करके गलत कानून रद्द कर  सकें व सही कानून जनमत के द्वारा लागू कर सकें।

ताकि धरने- प्रर्दशन में जनता के समय ऊर्जा- धन की बचत हो सकें

इसके लिये RRP देश मे TCP कानून(transparent complaint procedure) प्रस्तावित किया है।

यदि यह कानून लागू हो जाता है तो जनता को यह अधिकार मिल जाएगा कि किसी मौजूदा गलत क़ानून को रद्द करने हेतु स्वीकृति(राय) दे सकतें है व कोई अच्छा नया कानून लागू करने हेतु भी स्वीकृति दे सकेंगे।

अतः मेरा सभी से निवेदन रहेगा कि सभी टीसीपी कानून को पढ़े व इस कानून का प्रसार करें, ताकि इस कानून के नेतृत्व में जनांदोलन तैयार किया जा सके,ताकि रोज़- रोज़ के धरने -प्रर्दशन से छुटकारा मिल सके।