जयपुर के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह हॉस्पिटल का एक नजारा

आज से कुछ दिन पहले मैं मेरे एक मरीज को लेकर जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में पहुंचा, पूरा दिन इधर से उधर और उधर से इधर भागते भागते शाम को 4:00 बजे मेरे मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गयाा, उसके बाद जैसे ही हम अंदर बाढ़ में घुसते हैं वहां जो रेजिडेंट डॉक्टर बैठे हुए होते हैं उनका एटीट्यूट आपको देखे से नहीं देखा जाएगा, बड़ी मुश्किल से सब कुछ सहन करते करते आपको एडमिट किया जायेगा ,उसके बाद आपको अस्पताल की ओर से बोला जाएगा कि जहां भी जगह मिले वहां आप लेट जाएं, अब चाहे आप के मरीज के लिए बेड वहां अवेलेबल हो या नहीं , ऐसे तैसे करके हमने हमारे मरीज को अस्पताल के  बड़ों के पास में रखी हुई दो बैंच को कलेक्ट किया और उन बाँचो के ऊपर हमें अस्पताल की ओर से गद्दा मिलाने बेडशीट और उन दोनों बैंच को कमेंट करके अपनी खुद की दरी बिछाकर अपने मरीज को लिटा दिया l उसके बाद लगभग 3 घंटे बाद वहां पर कंपाउंडर आते हैं और मरीज का इलाज चालू करने के लिए कुछ दवाइयां की पर्ची हमें थमा देते हैं l

 जब हम उन दवाइयों को लेने के लिए उस पर्ची को हाथ में लेकर जो अस्पताल में फ्री दवाइयां मिलती हैं दुकानों पर गए तो वहां हमें पता चलता है कि वहां पर जो दवाइयां हमें अस्पताल की ओर से लिखी गई थी वह दवाइयां ही उस दुकान पर मौजूद नहीं थी आख़रमें  हम परेशान होकर जैसे ही अस्पताल के बाहर की दुकानों से दवाइयां खरीदने को निकलते हैं वहां पर कुछ दलाल लाइन लगाकर खड़े हुए होते हैं वह दलाल आपसे बड़े प्रेम से दवाइयों के बारे में पूछते हैं अंदर जो हेल्पलाइन की दवाइयां मिलती है और दुकानों के बारे में आपको बताते हैं आखिर मैं आपसे कहें कि हम डिस्काउंट के साथ हमारी दुकान से आपको यह दवाई दिलवा ते हैं आखिर मंजर यह है कि जो जनता की दवाई की कीमत मार्केट में एक रुपए है वह दवाई आपको 20 से ₹50 में खरीदने के लिए आपको वह दलाल अपनी उन दुकानों पर ले जाते हैं जहां पर एक कोई इंजेक्शन की एमआरपी 1800रु, लिखी हुई है और आपको काफी मोटा डिस्काउंट होने के बाद ₹600 का वह जंक्शन बड़े डिस्काउंट के साथ मिल जाता है आपको बड़ी खुशी होती है कि मुझे 1800 ₹ का इंजेक्शन 600 में मिल गया है लेकिन वह जेनेरिक दवाइयां असल में  ₹20 ही होती है ऐसे हालात में उस मेडिकल की दुकान का कमीशन दलालों को अंदर जो s.m.s. में मिलने वाली दवाइयों में बैठे हुए कर्मचारियों को कमीशन पहुंचता है ll

 इसलिए अंदर बैठे हुए दवाइयों की दुकान पर कर्मचारी हैं वह आपको अंदर साफ मना कर देंगे कि यह दवाई आपको या नहीं मिलेगी तो आखिरकार आपको बाहर से खरीदनी पड़ेगी,, फिर मरीज के पास पहुंचते हैं को दवाइयां स्टार्ट करने के लिए एक से डेढ़ घंटे का स्टाफ स्टाफ आने का इंतजार करना पड़ेगा ll आप कुछ बोल नहीं सकते क्योंकि हमारी राजस्थान सरकार ने डॉक्टरों को यह पावर और यह नियम बना रखे हैं कि मरीज के टेंडर डॉक्टर से किसी तरह की बहस बाजी नहीं कर सकते की आवाज में नहीं बोल सकते तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर अपनी मनमानी तो करेगा ही ll

 आपको इलाज करवाना है आप करवाओ नहीं करवाना है तो घर जाओ यदि आपके बोतल लगी हुई है बोटल में दवाई खत्म हो जाती है तो आप उस बोटल को हटवाने के लिए भी नर्सिंग स्टाफ को बोल बोल कर थक जाएंगे लेकिन वह बोतल हटाने स्टाफ नहीं आएगा आखिरकार या तो मरीज को उठनी पड़ेगी या किसी दूसरे मरीज के अटेंडर को कहने का मतलब सीधा सीधा यह है कि जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में जो भी अभिव्यक्ति अपने मरीज को इलाज के लिए लेकर जाता है 

वह यह समझ कर जाए कि मैं मेरे मरीज के साथ दोबारा वापस आऊंगा या नहीं क्योंकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल पूरे स्टाफ की यदि आप कहीं कोई कंप्लेंट भी करोगे तो कहा ll 
वहां सुनने वाला कोई नहीं है ऐसे हालात में पूरे अस्पताल प्रशासन में कोई शिकायत बॉक्स भी आपको नजर नहीं आएगा रही बात गंदगी की तो वह आपको जगह-जगह बीड़ी तंबाकू गुटके के निशान लोगों के थूकना की जगह वहां एक आम बात है अंदर अस्पताल के वार्डों में आप किसी तरह की कोई साफ-सफाई नजर नहीं आएगी ,, 

टॉयलेट यदि आप जाओगे तो वहां अंदर आप ठीक से बाथरूम तक नहीं कर सकते की बदबू इतनी आएगी कि अगर कोई आदमी पहली बार जा रहा है तो वह बेहोश हो सकता है
 धन्य है ऐसे हमारे राजस्थान के सवाई मानसिंह अस्पताल लोग कहते हैं कि वहां पर इलाज अच्छा होता है और फ्री होता है लेकिन जो स्थिति हमने देखी है राजस्थान सरकार सिर्फ अपनी वाहवाही लूटने के लिए जनता को परेशान करने का काम करती है ,,
 अस्पताल द्वारा इतना परेशान किया जाता है कि उसे प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज कराने जाना पड़ता है,,
और आखिर में वहां पर भी हो लूट का शिकार ही होता है मरीज के बचने की कोई गारंटी नहीं है,,
अतर सिंह मीणा
जय हिन्द