करौली की जनता के प्रति पुलिस का दोगला रवैया

करौली पुलिस कप्तान यूं तो सुर्खियां बटोरने में काफी कामयाब हुए हैं लेकिन कहीं ना कहीं राजनीति के दवाब में अपना काम करने में समर्थ नहीं है क्योंकि ऐसे कई मामले मर्डर लूट अफीम की खेती जैसे मुकदमे बेशक करौली जिले के अलग-अलग थाने में दर्ज हैं लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद करौली पुलिस से नहीं करनी चाहिए, क्योंकि करौली पुलिस कप्तान शायद यह भली-भांति समझ चुके हैं की नौकरी करनी है तो नेताओं का आशीर्वाद होना बहुत जरूरी है शायद करौली पुलिस ये भूल चुकी है की एक आईएएस और आईपीएस का पद अपनी मेहनत लगन और मां-बाप की खून पसीने की कमाई लगाने के बाद एक होनहार नवयुवक को मिलते हैं बदकिस्मती है कि ऐसे जिले का भार संभालने की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन कुर्सियों को नेताओं का गुलाम बनना पड़ता है और ऐसे अधिकारियों को उन राजनेताओं की गुलामी स्वीकार करनी पड़ती है ऐसे काफी सारे मामले करौली जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं जिनकी सिर्फ इन्वेस्टिगेशन अभी तक चल रही है जबकि यदि पुलिस चाहे तो 24 घंटे के अंदर किसी भी तरह के क्राइम की जड़ तक आसानी से पहुंच सकती है और अपराधी को आसानी से अपनी गिरफ्त में ले सकती है लेकिन ऐसा क्या कुर्सी का लालच जिसकी वजह से जिले की कमान संभालने वाले अधिकारियों को गुलाम बनना पड़ता है जनता की सेवा करने का एक बहुत बड़ा मौका आर एस और आईपीएस को मिलता है लेकिन पुलिस की भी अपनी मजबूरियां हैं उन्हें जैसा अपने बीवी बच्चों से प्यार है अपनी नौकरी से प्यार है उसी तरह से पुलिस को उन पीड़ित परिवार के बारे में भी एक बार सोचना चाहिए, करौली पुलिस कप्तान से मैं पूछना चाहता हूं कि यदि कोई पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास नहीं जाएगा और पुलिस उसकी मदद नहीं करेगी तो वह कहां जाए ऐसे हालात में पुलिस का भरोसा पब्लिक से पूरी तरह उठ चुका है क्या पुलिस सिर्फ नेताओं के काम के लिए ही होती है कानून हिंदुस्तान में हर नागरिक के लिए बराबर होता है लेकिन करौली में लगता है लगता है पुलिस सिर्फ नेताओं के लिए ही काम करती है करौली पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में काफी सुधार करने की जरूरत है मैं मानता हूं कि जो आईएएस और आईपीएस अधिकारी जितना लंबा जिले की उस मुख्य कुर्सी पर बैठा हुआ है वह सिर्फ नेताओं के आशीर्वाद से अपने होनर और अपनी काबिलियत के हिसाब से नहीं क्योंकि नेताओं को सिर्फ ऐसा अधिकारी चाहिए जो उनके इशारे पर नाचे उनके हिसाब से काम करें उनके हिसाब से कानून व्यवस्था को संभाले और उसमें मुझे लगता है हमारे करौली के आर्यस और आईपीएस अफसर वहां के राजनेताओं के लिए फिट बैठते हैं करौली पुलिस का एक नारा है स्लोगन है आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर जबकि अगर जमीनी स्तर पर देखें तो यह सिर्फ स्लोगन है जो पुलिस थानों के आगे लिखा हुआ है हकीकत में अगर खासकर में सपोटरा विधानसभा क्षेत्र की अगर बात करूं तो वहां हंड्रेड परसेंट पुलिस का यह स्लोगन उल्टा काम कर रहा है