आज छात्रावास जाट की सराय हिंडौन सिटी में महाराजा सूरजमल का बलिदान दिवस मनाया गया ll

आज महाराजा सूरजमल जाट छात्रावास महाराजा हिण्डौन में हिन्दू हृदय सम्राट महाराजा सूरजमल जी का बलिदान दिवस मनाया और पुष्पांजलि दी गई । युवा जाट महासभा करौली जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली ने कहा कि सूरजमल जी का बचपन का नाम सुजान सिंह ,13 फरवरी 1707 को जन्मे थे ।  25 दिसम्बर 1763 को जान गंवा दीपूरा नाम श्री महाराज विराजमान बृजेन्द्र महाराज सूजान सिंह जी बहादुर , अन्य नाम भूपाल पालक भूमिपति बदनेश नँद सुजान, सिंह सूरज कुमार, सिंह सूरज सुजान, रविमल्ल आदि , पिताश्री का नाम राजा बदन सिंह , पितामह का नाम सिनसनी के जागीरदार  श्री ठाकुर भाव सिंह सिनसिनिवार (सिनसिनी के राव चूड़ामन सिंह जी के भ्राता) माता का नाम रानी देवकी जी , पडदादा का नाम  सिनसनी के जागीरदार ठाकुर ब्रिजराज सिंह जी , पडदादी का नाम ठाकुररानी अमृता कौर (चकसाना रियासत के चौधरी चंद्रा सिंहजी की बेटी) , नानाश्री का नाम कॉमर के चौधरी अखेराम सिंह बैनिवाल , प्रमुख शिक्षक आचार्य सोमनाथ जी । इनका कद 7 फुट 2 इंच ,वजन लगभग 150 किलोग्राम शरीर की बनावट- सुडौल, मजबूत, गठीली,शाही तेवर वाली मोटी आंखे, चौड़ा ललाट, लम्बी रौबदार मूंछे,लंबे तगड़े और वजनदार आवाज दबंग छवि,सुंदर नैन नक्श। गांव जटवाड़ा, राजधानी भरतपुर(लोहागढ़), डीग(सर्दी के मौसम में) ध्वज महल पर पीताम्बर ध्वज, किले पर भगवा कपिध्वज, युद्ध में भगवा और केसरिया ध्वज

कुलदेवता श्रीकृष्ण भगवान
कुलदेवी राज राजेश्वरी कैला देवी
वंश प्रवर्तक शूरसेन(सिनसिना) बाबा । इनकी पत्नी महारानी किशोरी बाई,महारानी खेतकौर, महारानी गंगिया, रानी हंसिया, रानी गौरी, रानी कल्याणी आदि । जवाहर सिंह, रतनसिंह, नाहर सिंह, रणजीत सिंह, नवल सिंह पुत्र थे । पूर्व बल्लभराम लहकोडिया ने कहा कि 24 दिसम्बर तक उन्होने दिल्ली जीत ली थी। ज्यादातर हिस्सो पर उनका कब्जा था बस कुछ युद्ध ही शेष था । फिर भी वे घायल अवस्था में अकेले ही उनसे वीरता से लड़े और एक लंबे संघर्ष के पश्चात वीरगति की प्राप्त हुए थे।  नाहर सिंह डागुर ने कहा महाराजा सूरजमल भवज निर्माण कला के बहुत बड़े ज्ञाता एवं जानकार थे। उन्होंने डीग, भरतपुर, कुम्हेर आदि समेत ब्रिज में कई भव्य किलों का निर्माण किया। भरतपुर के लोहागढ़ किला तो ऐसी सामरिक बनावट में बना के उसे कभी कोई नहीं जीत सका। नरेश सोलंकी ने कहा कि महाराजा सूरजमल ने अनेकों महल बनवाएं जिनमें डीग के जलमहल, भरतपुर के महल प्रसिद्ध है । राज्य विस्तार भरतपुर धौलपुर समेत राजस्थान के कुछ हिस्से, आधा हरियाणा, वेस्ट यूपी, ब्रिज प्रदेश और दिल्ली के कुछ हिस्से उनके राज्य का हिस्सा था।
महाराजा सूरजमल जी को उनके धर्म हेतु किये गए कार्यों के लिए हिंदुआ सूरज व हिन्दू ह्रदय सम्राट के नाम से जाना जाता है । उनकी एक लाखा तोप तो इतनी 
शक्तिशाली थी और लोहागढ़ किला देश का एकमात्र अजेय किला है जिसे अफगान मुगल रुहेले कोई नहीं जीत पाया। उनके बेटे रणजीत सिंह के कार्यकाल में आंग्रेजो ने 13 बार इस किले पर आक्रमण किया परन्तु अंग्रेजो को हर बार मुंह की खानी पड़ी। महाराजा सूरजमल देश के ऐसे एकमात्र राजा थे जिन्होंने मुगलो से दिल्ली को आजाद करवाने के लिए दो बार आक्रमण किये और मुगलो के बुरी तरह से  छक्के छुड़ाए । अब्दाली जब 1757 में मथुरा वृन्दावन लुटने आया और यमुना का पानी लोगो के खून से लाल कर दिया था तो उससे लोहा लेने वाले वे एकमात्र राजा थे और उसे धर्मनगरी से निकालकर ही दम लिया था। इसके अलावा भी महाराजा सूरजमल जी की अनेको विरताएँ हैं जिन्हें किसी एक किताब या एक पोस्ट में समेटे जाना असम्भव है । आगरा के लाल किले पर जिसने भगवा फहराया था । ताजमहल की कब्रो पर जिसने घोड़ा बन्धवाया था । मथुरा वृन्दावन के घाटों को फिर से जिसने सजवाया था । भारतभूमि ने अब बहुत ज्यादती सहन कर ली थी । जिसके भालों के वार से असद खां दर्द से कहराता था । जिसके शासन में अलीगढ़ शहर रामगढ़ कहलाता था और  बदन सिंह का देवकीनन्दन महाराजा सूरजमल कहलाता था।जिसका लोहागढ़ सदा अजेय रहा शान से इतराने को कितने ही किले महल बने है ऐश्वर्य उनका बतलाने को न जाने उसने रणभूमि में कितनो को धूल चटाई थी । जिसके कारण हिंदुआ ध्वज शान से लहराता था और बदन सिंह का देवकीनन्दन महाराजा सूरजमल कहलाता था। इस अवसर पर पूर्व डीईईओ हिण्डौन बल्लभराम लहकोडिया , युवा जाट महासभा करौली जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली , रामोतार जाट , बलवन्त बैनीवाल , नरेश सोलंकी , मोरध्वज पहलवान , के.के.चौधरी , मुकेश चौधरी , वीरेंद्र सोडवाल , विनोद डागुर , नाहर सिंह डागुर , संदीप सोलंकी , श्यामसुंदर जाट , योगेन्द्र डागुर , गौरव डागुर , लवली जाट, गौरव बैनीवाल , कुलदीप बैनीवाल , दलजीत , विशाल , रामबिहारी डागुर आदि मौजूद रहे ।