कमीशन खोरी के चलते 2 साल मैं ही सरकारी भवन की खस्ता हालत खुली ठेकेदारों की पोल

सरकार की ओर से आमजन की सुविधाओं के लिए भारी बजट पास कर स्कूल अस्पताल सड़क अन्य सार्वजनिक भवनों के निर्माण कराए जाते हैं लेकिन ठेकेदार व अधिकारियों की कमीशन खोरी से इन भवनों में लगने वाला मटेरियल कितना गुणवत्तापूर्ण है इसका अंदाजा भवन बनने के साल एक या दो साल बाद लगता है या फिर तैयार होने के बाद जांच अधिकारी लगा सकते हैं जो उपयोग होने के कुछ दिन बाद ही भवन की दीवारों में दरार,टाइल्स, उखड़ने लगती हैं तब इसका खुलासा होता है ऐसा ही मामला नादौती तहसील के केमला गांव में देखने को मिला करीब एक सवा करोड़ की लागत से चिकित्सा भवन का निर्माण कराया गया था पीएचडी भवन के निर्माण में एन एच म बिंग कंपनी द्वारा किया गया था जिसके चलते अब भवन की हालत काफी खस्ता हो चुकी है इसकी शिकायत ग्रामीणों ने सरपंच ठेकेदारों से कि उन्होंने अपनी अपनी सफाई पेश की है